प्रकाशित ग़ज़लें
इनका परिचय इन्हीं की ज़ुबानी- बम जैसा मुस्तक़बिल है (आतिथ्य कविता)
- जिस्म कमाने निकल गया है (आतिथ्य कविता)
- शायद कोई मोटी मछली फ़ोन करे (आतिथ्य कविता)
- अंकल जैसे लोग
- क्या ज़रूरी है कि सबसे ज्ञान लें
- अपने जानिस्तान में कैसे रहें
- तू बेयक़ीन है, मत जा शराबख़ाने में
- इस दुनिया को काट के कितनी दुनियाएँ बनती हैं
- हर तरफ़ हो गई भिखारी रात
- सिलसिला जारी है...
- मेरी सारी चाय ठंडी हो गई...
- तुम्हें हो ईद मुबारक

दिल्ली आया और विनोद दुआ की शरण में जगह मिल गई, स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर। बस तब से लेकर आजतक, पिछली एक दहाई से इसी टीवी और फ़िल्मों की दुनिया में कुछ सार्थक कर पाने की जुगत में हूं। क्या-क्या किया ये बताना ठीक नहीं, लगेगा नौकरी के लिये बायो-डाटा लिख रहा हूं।
1.हिन्द-युग्म के तीसरे अतिथि कवि
2.हिन्द-युग्म पर कविता लेखन-संपादन, आलेख लिखने (बैठक तथा आवाज़ पर) तथा हिन्द-युग्म की जमीनी आयोजनों में सक्रिय
प्रकाशित आलेख (बैठक पर)
- बीजेपी : कॉट संघ बोल्ड जिन्ना
- पत्रकारिता में गांव या गांव की पत्रकारिता...
- देव का पाकिस्तान
- लोकतंत्र से ज़्यादा अहम आईपीएल ???
- वक़्त का तक़ाज़ा भी यही है....
- यक़ीन पर कैसे यक़ीन करें...
- एक जनवरी ऐसी भी....
- क्या ये पहली बार हुआ है?